Friday, 25 September 2020

कोरोना महामारी के बीच बिहार में सत्ता संग्राम-2020 का शंखनाद


आखिरकार लंबे इंतजार के बाद कोरोना काल में सबसे बड़े चुनाव संग्राम के तौर पर बिहार में विधानसभा चुनाव का ऐलान हो ही गया। लंबे इंतजार की बात हम यहां इसलिए कर रहे हैं क्योंकि 2015 में चुनाव तारीखों का ऐलान 9 सितंबर को ही कर दिया गया था। चुनाव आयोग की घोषणा के मुताबिक, 243 सीटों पर तीन चरणों में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को मतदान कराया जाएगा। 10 नवंबर मंगलवार को नतीजों की घोषणा की जाएगी। इसकी घोषणा आज यानी शुक्रवार दोपहर मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने किया। नजर मध्यप्रदेश की 28 विधानसभा सीटों समेत देशभर की 56 अलग-अलग सीटों पर उपचुनाव की घोषणा पर भी थी लेकिन इस पर फैसला 29 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया है। क्यों टाला गया इसे आप बखूबी समझ सकते हैं।

14 नवंबर को दीपावली से चार दिन और 18 नवंबर से शुरू होने वाले छठ पर्व से 8 दिन पहले यह साफ हो जाएगा कि बिहार में अगली सरकार किसकी बनेगी। मौजूदा विधानसभा का टर्म 29 नवंबर 2020 तक है। चुनाव आयोग के मुताबिक, 243 सीटों पर इस बार के चुनाव में 7.29 करोड़ लोग वोट डाल सकेंगे। इनमें 3 करोड़ 85 लाख पुरुष और 3.39 करोड़ महिला वोटर हैं। पिछले विधानसभा चुनाव के वक्त 6 करोड़ 70 लाख वोटर थे। कुल 42 हजार पोलिंग बूथ पर 1 लाख 73 हजार वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा। 

चुनाव आयोग ने आज जो सबसे बड़ी घोषणा की वह यह कि कोरोना की वजह से मतदान की समयावधि में एक घंटे का इजाफा किया गया है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर सामान्य इलाकों में सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे के बीच वोटिंग होगी। एक पोलिंग बूथ पर 1500 की जगह 1000 वोटर ही आएंगे। कोरोना के मरीज वोटिंग के दिन आखिरी घंटे में ही वोट डाल पाएंगे। कोरोना की वजह से कुछ खास इंतजाम भी किए गए हैं। मसलन, चुनाव में 46 लाख मास्क, 7.6 लाख फेस शील्ड, 23 लाख जोड़ी हैंड ग्लव्स और 6 लाख पीपीई किट्स का इस्तेमाल होगा। नामांकन के दौरान उम्मीदवार 5 की जगह 2 ही गाड़ियां साथ ले जा सकेंगे।

पहला चरण : 28 अक्टूबर को 71 सीटों पर मतदान
कहलगांव, सुल्तानगंज, अमरपुर, धोरैया (एससी),  बांका, कटोरिया (एसटी), बेलहर, तारापुर, मुंगेर, जमालपुर, सूर्यगढ़, लखीसराय, शेखपुरा, बारबीघा, मोकामा, बाढ़, मसौढ़ी (एससी), पालीगंज, बिक्रम, संदेश, बराहरा, आरा, अगियांव (एससी), तरारी, जगदीशपुर, शाहपुर, ब्रह्मपुर, बक्सर, दुमरांव, रायपुर (एससी), मोहनिया (एससी), भभुआ, चैनपुर, चेनारी (एससी), सासाराम, करगहर, दिनारा, नोखा, डेहरी, काराकट, अरवल, कुर्था, जहानाबाद, घोसी, मखदूमपुर (एससी), गोह, ओबरा, नबीनगर, कुटुम्बा (एससी), औरंगाबाद, रफीगंज, गुरुआ, शेरघाटी, इमामगंज (एससी), बाराचट्टी (एससी), बोध गया (एससी), गया टाउन, टीकरी, बेलागंज, अतरी, वजीरगंज, राजौली (एससी), हिसुआ, नवादा, गोबिंदपुर, वारसलीगंज, सिकंदरा (एससी), जमुई, झाझा, चकाई।  

दूसरा चरण : 3 नवंबर को 94 सीटों पर मतदान
नौतन, चनपटिया, बेतिया, हरसिद्धि (एससी), गोविंदगंज , केसरिया, कल्याणपुर, पिपरा, मधुबन, शिवहर, सीतामढ़ी, रुन्नीसैदपुर, बेलसंड, मधुबनी, राजनगर (एससी), झंझारपुर, फूलपारस, कुशेश्वरस्थान (एससी), गौरा बौरम, बेनीपुर, अलीनगर, दरभंगा ग्रामीण, मीनापुर, कांटी, बरुराज, पारू, साहेबगंज, बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचाइकोट, भोरे (एससी), हथुआ, सीवान, ज़िरादेई, दरौली (एससी), रघुनाथपुर, दरौंदा, बरहरिया, गोरैयाकोठी, महराजगंज, एकमा, मांझी, बनियापुर, तरैया, मढ़ौरा, छपरा, गरखा (एससी), अमनौर, परसा, सोनपुर, हाजीपुर, लालगंज, वैशाली, राजा पाकर (एससी), राघोपुर, महनार, उजियारपुर, मोहिउद्दीननगर, विभूतिपुर, रोसरा (एससी), हसनपुर, चेरिया-बरियारपुर, बछवारा, तेघरा, मटिहानी, साहेबपुर कमाल, बेगूसराय, बखरी (एससी), अलौली (एससी), खगड़िया, बेलदौर, परबत्ता, बिहपुर, गोपालपुर, पीरपैंती (एससी), भागलपुर, नाथनगर, अस्थावन, बिहारशरीफ, राजगीर (एससी), इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा, हरनौत, बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब, फतुहा, दानापुर, मनेर, फुलवारी (एससी)।   

तीसरा चरण : 7 नवंबर को 78 सीटों पर मतदान
वाल्मीकि नगर, रामनगर (एससी), नरकटियागंज, बगहा, लौरिया, सिकटा,  रक्सौल, सुगौली, नरकटिया, मोतिहारी, चिरैया, ढाका, रीगा, बथनाहा (एससी), परिहार, सुरसंड, बाजपट्टी, हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, लौकहा, निर्मली, पिपरा, सुपौल, त्रिवेणीगंज (एससी), छातापुर, नरपतगंज, रानीगंज (एससी), फारबिसगंज, अररिया, जोकीहाट, सिकटी, बहादुरगंज, ठाकुरगंज, किशनगंज, कोचाधामन, अमौर, बैसी, कस्बा, बनमनखी (एससी), रूपौली, धमदाहा, पूर्णिया, कटिहार, कदवा, बलरामपुर, प्राणपुर, मनिहारी (एससी), बरारी, कोरहा (एससी), आलमनगर, बिहारीगंज, सिंहेश्वर (एससी), मधेपुरा, सोनबरसा (एससी), सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, महिषी, दरभंगा, हायाघाट, बहादुरपुर, क्योटी, जाले, गायघाट, औराई, बोचहां (एससी), सकरा (एससी), कुढ़नी, मुजफ्फरपुर, महुआ, पातेपुर (एससी), कल्याणपुर (एससी), वारिसनगर, समस्तीपुर, मोरवा, सरायरंजन।

2015 में पांच चरणों में कराया गया था मतदान
2015 के चुनाव में चुनाव आयोग ने बिहार में पांच चरणों में चुनाव कराया था, जिसकी तारीखों का ऐलान 9 सितंबर को ही कर दिया गया था। नतीजे 8 नवंबर को आए थे। इस चुनाव में महागठबंधन को बहुमत मिली थी। 2015 के चुनाव में पहले चरण यानी 12 अक्टूबर को बांका, भागलपुर, बेगूसराय, जमुई, खगड़िया, लखीसराय, मुंगेर, नवादा, समस्तीपुर और शेखपुरा की 49 सीटों पर चुनाव हुआ था। दूसरे चरण में 16 अक्टूबर को अरवल, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, कैमूर, रोहतास की 32 सीटों पर चुनाव हुआ था। तीसरे चरण में 28 अक्टूबर को भोजपुर, बक्सर, नालंदा, पटना, सारण, वैशाली की 50 सीटों पर चुनाव हुआ था। चौथे चरण में 1 नवंबर को गोपालगंज, पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुफ्फरपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, सीवान की 55 सीटों पर चुनाव हुआ था। आखिरी चरण यानी 5 नवंबर को अररिया, दरभंगा, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा, मधुबनी, पुर्णिया, सहरसा, सुपौल की 57 सीटों पर चुनाव हुआ था। वोटों की गिनती 8 नवंबर को हुई थी। तब 243 सीट वाली बिहार विधानसभा में महागठबंधन के खाते में 178 सीटें आई थी जिसमें आरजेडी को 80, जेडीयू को 71 और कांग्रेस को 27 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि एनडीए के खाते में 58 सीटें आई थी, जिसमें भाजपा को 53, लोजपा को 2, रालोसपा को 2 और हम को एक सीट पर जीत मिली थी।

2019 का लोकसभा चुनाव परिणाम 

2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 में 39 सीटें एनडीए को मिली थीं। सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार जीता था। लोकसभा के नतीजों को अगर विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो एनडीए को 223 सीटों पर बढ़त मिली थी। इनमें से 96 सीटों पर भाजपा तो 92 सीटों पर जेडीयू आगे थी। लोजपा 35 सीटों पर आगे थी। एक सीट जीतने वाला महागठबंधन विधानसभा के लिहाज से 17 सीटों पर आगे था। इनमें 9 सीट पर राजद, 5 पर कांग्रेस, दो पर हम (सेक्युलर) जो अब एनडीए का हिस्सा हैं और एक सीट पर रालोसपा को बढ़त मिली थी। अन्य दलों में दो विधानसभा क्षेत्रों में एआईएमआईएम और एक पर सीपीआई एमएल आगे थी।

2020 के मुख्यमंत्री पद के दावेदार

नीतीश कुमार : 2010 के चुनाव में नीतीश एनडीए की ओर से तो 2015 में महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे। इस बार फिर वो एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा हैं। पिछले 15 साल से राज्य में नीतीश की पार्टी सत्ता में है। इनमें 14 साल से ज्यादा नीतीश ही मुख्यमंत्री रहे हैं।
तेजस्वी यादव : महागठबंधन की ओर से इस बार तेजस्वी यादव चेहरा हो सकते हैं। लालू यादव के जेल जाने के बाद महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद का चेहरा तेजस्वी ही हैं। हाल ही में, राजद के पार्टी कार्यालय के बाहर चुनाव से जुड़ा जो पोस्टर लगाया गया उसमें अकेले तेजस्वी नजर आ रहे थे। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का चेहरा पोस्टर से गायब था।

2020 चुनाव के बड़े मुद्दे क्या हैं?

इन चुनावों में कोरोना बड़ा मुद्दा होगा। तेजस्वी यादव कोरोना को लेकर लगातार सरकार पर हमला कर रहे हैं। कोरोनाकाल में नीतीश कुमार के घर से बाहर नहीं निकलने को भी उन्होंने मुद्दा बनाया है। वहीं, नीतीश की ओर से सरकार द्वारा पिछले छह महीने में उठाए कदमों को गिनाया जा रहा है। केंद्र सरकार के कृषि से जुड़े दो नए बिल भी इन चुनावों में बड़ा मुद्दा बनेगा। राजद बेरोजगारी के मुद्दे को लगातार उठा रही है। प्रधानमंत्री के जन्मदिन को राजद ने राष्ट्रीय बेरोजगारी दिवस के रूप में मनाया। नीतीश सरकार लॉकडाउन के दौरान बिहार लौटे प्रवासी मजूदरों से बिहार में ही रोजगार देने का दावा कर रही है। जेडीयू और भाजपा जहां पिछली केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से किए गए कामों को गिना रही है वहीं, राजद पिछले 15 साल में किए विकास के दावों को लगातार चुनौती दे रहा है। लॉकडाउन के दौरान बिहार लौटे प्रवासी मजदूरों का मुद्दा भी इस चुनाव में अहम होगा। सरकार जहां इन्हें प्रदेश में ही हर संभव मदद देने की बात कर रही है वहीं, विपक्ष प्रवासियों के लिए समुचित इंतजाम नहीं करने पर सवाल उठा रहा है। इसके अलावा पिछले 30 साल से चुनावी मुद्दा रहा राम मंदिर भाजपा के लिए इस बार भी बड़ा मुद्दा रहेगा। फर्क सिर्फ इतना होगा कि इस बार भाजपा इसके शिलान्यास को अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर गिनाएगी।

चुनाव प्रचार के प्रमुख चेहरे

नरेंद्र मोदी : भाजपा ने 2013 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद से हर चुनाव में मोदी ही भाजपा के लिए प्रचार का प्रमुख चेहरा रहे हैं। उनकी रैलियां भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने का बड़ा जरिया रही हैं। कोरोना की वजह से इस बार बड़ी रैलियां होना मुश्किल है। ऐसे में मोदी की वर्चुअल रैलियां मतदाताओं पर कितना असर डालती हैं ये देखना होगा।
नीतीश कुमार : जेडीयू और उससे पहले समता पार्टी के दौर से ही नीतीश हर चुनाव प्रचार में पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं। इस चुनाव में एनडीए गठबंधन उनके ही चेहरे पर चुनाव लड़ रहा है।
तेजस्वी यादव : चुनावी राजनीति में महज पांच साल का अनुभव रखने वाले तेजस्वी यादव के हाथ में इस बार के चुनाव प्रचार की कमान होगी। राजद के गठन के बाद ये पहला विधानसभा चुनाव होगा जब पार्टी लालू के बिना लड़ेगी।
राहुल गांधी : राहुल गांधी भले कांग्रेस अध्यक्ष नहीं हैं लेकिन, चुनाव प्रचार में वो कितने सक्रिय रहते हैं इस पर नजर रहेगी। प्रियंका गांधी के चुनाव प्रचार पर भी सभी की नजर रहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तबियत को देखते हुए पार्टी राहुल और प्रियंका गांधी को आगे कर सकती है।
चिराग पासवान : लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान चुनाव प्रचार में अपनी पार्टी का सबसे बड़ा चेहरा होंगे। एनडीए युवाओं और दलितों को लुभाने के लिए उनका इस्तेमाल कर सकता है। हालांकि, पासवान और उनकी पार्टी की ओर से जिस तरह सीटों के लेकर बयान आ रहे हैं उससे तय है कि एनडीए में सीटों का बंटवारा इतना आसान नहीं होने वाला है।
कन्हैया कुमार : भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के पोस्टर बॉय कन्हैया कुमार अपनी पार्टी के साथ-साथ महागठबंधन के भी प्रमुख चुनाव प्रचारक के तौर पर नजर आएंगे। बिहार चुनाव के मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अगर कोई चुनौती देने वाला नेता है तो वह कन्हैया कुमार ही होंगे।