क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के भी खेल बड़े निराले हैं. अमेरिका की क्रेडिट रेटिंग गिरने के बाद दुनिया के तमाम विकसित व विकासशील देशों को क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का भूत सताने लगा है. अमेरिका के इतिहास में पहली बार उसकी क्रेडिट रेटिंग गिरा कर उसे सबसे बड़े कर्ज संकट में डुबोने वालीएजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर (एसएंडपी) ने चेतावनी जारी की है कि वह भारत, जापान और मलेशिया जैसे देशों की क्रेडिट रेटिंग भी गिरा सकता है. यह सुनकर भारतीयों के तो होश उड़ गए. आनन-फानन में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को देश को यह भरोसा दिलाना पड़ा कि देश इस संकट से निपटने में सक्षम है.
किसने मचाया तहलका?
एसएंडपी की कमान फिलहाल एक भारतीय के हाथ में है जिनका नाम है देवेन शर्मा. वह झारखंड के रहने वाले हैं. शर्मा का जन्म 1955 में झारखंड में हुआ. इनके पिता आर एन शर्मा कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी सीसीएल के अधिकारी थे जो बाद में कोल इंडिया के अध्यक्ष भी बने थे. देवेन की पढ़ाई धनबाद, रांची और जमशेदपुर में हुई. वह धनबाद के एक क्रिश्चियन स्कूल डी नोबिली स्कूल से पढ़े हैं. देवेन ने 1977 में रांची के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से मेकेनिकल इंजिनियरिंग की डिग्री ली थी.
ऊच्च शिक्षा के लिए वह अमेरिका चले गए जहां विसकॉन्सिन से उन्होंने मास्टर्स डिग्री ली. 1987 में देवेन ने ओहायो से मैनेजमेंट में पीएचडी किया. उन्होंने शुरूआती दिनों में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में काम किया. बाद में वह एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट कंपनी में चले गए. 2002 में वह मैग्रा हिल्स में चले गए. यह कंपनी ही एसएंडपी की मूल कंपनी है जिसने अमेरिका की रेटिंग गिराकर तहलका मचा दिया. शर्मा की टीम पिछले काफी समय से अमेरिका के घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए थी. पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस की एक बैठक में भी देवेन ने भाग लिया था, लेकिन वह चुप्पी साधे रहे और किसी को भनक तक नहीं लगने दी कि वह और उनकी टीम अमेरिका की रेटिंग घटाने जा रही है.
कुछ यूं होता है रेटिंग का खेल
एएए, बीबीबी, सीसीसी, सीए, सी, डी आदि देखने और सुनने में स्कूली बच्चों के रिपोर्ट कार्ड के ग्रेड की तरह लगते हैं. लेकिन, यह स्कूली बच्चों को नहीं मिलता. यह देशों, बड़ी कंपनियों और बड़े पैमाने पर उधार लेने वालों का मूल्यांकन करती है. इस मूल्यांकन पर यह तय होता है कि उधार लेने वाले की माली हालत कैसी है? उसके उधार लौटाने की क्षमता कितनी है? ऐसे में अच्छा ग्रेड मिलने का सीधा मतलब है कम ब्याज पर आसानी से कर्ज लेने की पात्रता हासिल करना. वहीं, खराब मूल्यांकन मिलने पर ऊंची दरों पर बमुश्किल कर्ज मिलता है. इस समय रेटिंग की दुनिया में तीन बड़े नाम हैं. स्टैण्डर्ड एंड पूअर, मूडीज और फिच. इनमें सबसे पुरानी एजेंसी है स्टैण्डर्ड एंड पूअर. इसकी नींव 1960 में हेनरी पूअर ने रखी थी. पूअर ने अमरीका में नहरों और रेल नेटवर्क के विकास का इतिहास लिखा था. 1906 में गैर रेल कंपनियों के वित्त की जांच शुरू होने पर स्टैण्डर्ड स्टैटस्टिक ब्यूरो की स्थापना हुई. इन दोनों कंपनियों का 1940 के दशक में विलय हो गया. 1909 में जॉन मूडी ने मूडीज की स्थापना की. मूडीज ने भी रेल वित्त की साख का विश्लेषण और उनका मूल्यांकन करना शुरू किया. आज दुनिया के रेटिंग व्यवसाय का करीब 40 फीसदी कारोबार इन्हीं दो कंपनियों के पास हैं. फिच इन्हीं दोनों कंपनियों का छोटा रूप है.
अहमियत की वजह तो जानें
स्टैण्डर्ड एंड पूअर, मूडीज और फिच की ग्रेडिंग का इतना महत्वपूर्ण होने की अहम वजह है अमरीका की वित्तीय निगरानी करने वाली एजेंसी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन. 1975 में इस कमीशन ने इन तीन कंपनियों को मान्यता प्राप्त सांख्यिकीय रेटिंग एजेंसी घोषित किया था. इससे उधार लेने की इच्छुक कंपनियों और देशों का जीवन आसान हो गया. इन एजेंसियों ने उनकी वित्तीय हालत और साख का आकलन कर उन्हें रेटिंग देना शुरू कर दिया. इन रेटिंग एजेंसियों की ताकत तब और बढ़ गई, जब सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने आदेश दिया कि सरकारी नियंत्रण वाले निवेश संस्थान केवल ऊंची रेटिंग वाली कंपनियों में ही निवेश करें. ऐसी परिस्थितियों में जिन कंपनियों या देशों की रेटिंग नीचे जाती है, उनके लिए बहुत बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाती है. बड़ी निवेश वाली कंपनियां रेटिंग कम होने पर अपने निवेशों को बड़े पैमाने पर निकालना या बेचना शुरू कर देती है. ऐसे में उनके बांड की कीमत बाज़ार में और ज्यादा गिर जाती है और इससे उनको मिलने वाले कर्ज पर ब्याज और ज्यादा बढ़ जाता है.
ये जानना बहुत जरूरी
-एएए : सबसे मजबूत सबसे बेहतर
-एए : वादों को पूरा करने में सक्षम
-ए : वादों को पूरा करने की क्षमता पर विपरीत परिस्थितियों का पड़ सकता है असर
-बीबीबी : वादों को पूरा करने में सक्षम, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक हालात प्रभावित होने की ज्यादा गुंजाइश.
-सीसीसी : वर्तमान में बहुत कमजोर
-डी : उधार लौटाने में विफल
किसने मचाया तहलका?
एसएंडपी की कमान फिलहाल एक भारतीय के हाथ में है जिनका नाम है देवेन शर्मा. वह झारखंड के रहने वाले हैं. शर्मा का जन्म 1955 में झारखंड में हुआ. इनके पिता आर एन शर्मा कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी सीसीएल के अधिकारी थे जो बाद में कोल इंडिया के अध्यक्ष भी बने थे. देवेन की पढ़ाई धनबाद, रांची और जमशेदपुर में हुई. वह धनबाद के एक क्रिश्चियन स्कूल डी नोबिली स्कूल से पढ़े हैं. देवेन ने 1977 में रांची के बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा से मेकेनिकल इंजिनियरिंग की डिग्री ली थी.
ऊच्च शिक्षा के लिए वह अमेरिका चले गए जहां विसकॉन्सिन से उन्होंने मास्टर्स डिग्री ली. 1987 में देवेन ने ओहायो से मैनेजमेंट में पीएचडी किया. उन्होंने शुरूआती दिनों में मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में काम किया. बाद में वह एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट कंपनी में चले गए. 2002 में वह मैग्रा हिल्स में चले गए. यह कंपनी ही एसएंडपी की मूल कंपनी है जिसने अमेरिका की रेटिंग गिराकर तहलका मचा दिया. शर्मा की टीम पिछले काफी समय से अमेरिका के घटनाक्रम पर नज़र रखे हुए थी. पिछले महीने अमेरिकी कांग्रेस की एक बैठक में भी देवेन ने भाग लिया था, लेकिन वह चुप्पी साधे रहे और किसी को भनक तक नहीं लगने दी कि वह और उनकी टीम अमेरिका की रेटिंग घटाने जा रही है.
कुछ यूं होता है रेटिंग का खेल
एएए, बीबीबी, सीसीसी, सीए, सी, डी आदि देखने और सुनने में स्कूली बच्चों के रिपोर्ट कार्ड के ग्रेड की तरह लगते हैं. लेकिन, यह स्कूली बच्चों को नहीं मिलता. यह देशों, बड़ी कंपनियों और बड़े पैमाने पर उधार लेने वालों का मूल्यांकन करती है. इस मूल्यांकन पर यह तय होता है कि उधार लेने वाले की माली हालत कैसी है? उसके उधार लौटाने की क्षमता कितनी है? ऐसे में अच्छा ग्रेड मिलने का सीधा मतलब है कम ब्याज पर आसानी से कर्ज लेने की पात्रता हासिल करना. वहीं, खराब मूल्यांकन मिलने पर ऊंची दरों पर बमुश्किल कर्ज मिलता है. इस समय रेटिंग की दुनिया में तीन बड़े नाम हैं. स्टैण्डर्ड एंड पूअर, मूडीज और फिच. इनमें सबसे पुरानी एजेंसी है स्टैण्डर्ड एंड पूअर. इसकी नींव 1960 में हेनरी पूअर ने रखी थी. पूअर ने अमरीका में नहरों और रेल नेटवर्क के विकास का इतिहास लिखा था. 1906 में गैर रेल कंपनियों के वित्त की जांच शुरू होने पर स्टैण्डर्ड स्टैटस्टिक ब्यूरो की स्थापना हुई. इन दोनों कंपनियों का 1940 के दशक में विलय हो गया. 1909 में जॉन मूडी ने मूडीज की स्थापना की. मूडीज ने भी रेल वित्त की साख का विश्लेषण और उनका मूल्यांकन करना शुरू किया. आज दुनिया के रेटिंग व्यवसाय का करीब 40 फीसदी कारोबार इन्हीं दो कंपनियों के पास हैं. फिच इन्हीं दोनों कंपनियों का छोटा रूप है.
अहमियत की वजह तो जानें
स्टैण्डर्ड एंड पूअर, मूडीज और फिच की ग्रेडिंग का इतना महत्वपूर्ण होने की अहम वजह है अमरीका की वित्तीय निगरानी करने वाली एजेंसी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन. 1975 में इस कमीशन ने इन तीन कंपनियों को मान्यता प्राप्त सांख्यिकीय रेटिंग एजेंसी घोषित किया था. इससे उधार लेने की इच्छुक कंपनियों और देशों का जीवन आसान हो गया. इन एजेंसियों ने उनकी वित्तीय हालत और साख का आकलन कर उन्हें रेटिंग देना शुरू कर दिया. इन रेटिंग एजेंसियों की ताकत तब और बढ़ गई, जब सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन ने आदेश दिया कि सरकारी नियंत्रण वाले निवेश संस्थान केवल ऊंची रेटिंग वाली कंपनियों में ही निवेश करें. ऐसी परिस्थितियों में जिन कंपनियों या देशों की रेटिंग नीचे जाती है, उनके लिए बहुत बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाती है. बड़ी निवेश वाली कंपनियां रेटिंग कम होने पर अपने निवेशों को बड़े पैमाने पर निकालना या बेचना शुरू कर देती है. ऐसे में उनके बांड की कीमत बाज़ार में और ज्यादा गिर जाती है और इससे उनको मिलने वाले कर्ज पर ब्याज और ज्यादा बढ़ जाता है.
ये जानना बहुत जरूरी
-एएए : सबसे मजबूत सबसे बेहतर
-एए : वादों को पूरा करने में सक्षम
-ए : वादों को पूरा करने की क्षमता पर विपरीत परिस्थितियों का पड़ सकता है असर
-बीबीबी : वादों को पूरा करने में सक्षम, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में आर्थिक हालात प्रभावित होने की ज्यादा गुंजाइश.
-सीसीसी : वर्तमान में बहुत कमजोर
-डी : उधार लौटाने में विफल
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