राष्ट्रपति के बाद अब देश के एक और महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर पहली बार किसी महिला ने जगह बनाई। यह इतिहास रचने का सेहरा मीरा कुमार के सर रहा। मीरा कुमार आज लोकसभा की स्पीकर चुन ली गई हैं। वे भारत की पहली महिला लोकसभा स्पीकर हैं। कांग्रेस ही नहीं इस देश को भी मीरा में कई विशेषताएँ दिखीं और इसी वजह से वह लोकसभा के स्पीकर जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर सुशोभित हुईं। मीरा राइफल की निशानेबाजी में पदक विजेता रही हैं। नौकरशाह, वकील, महिला राजनीतिज्ञ मीरा कुमार दलित समुदाय की हैं और पूर्व उपप्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की बेटी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मीरा कुमार को लोक सभा का स्पीकर बनाने से कांग्रेस को फायदा मिलेगा क्योंकि वो खुद को महिला और दलित समर्थक के रूप में दिखा सकेगी। मीरा कुमार ने 70 के दशक में भारतीय विदेश सेवा में नौकरी की और कई देशों में नियुक्त रहीं। वे भारत-मॉरिशस संयुक्त आयोग की सदस्य भी रह चुकी हैं और ब्रिटेन में भारतीय उच्चायोग में भी काम कर चुकी हैं। राजनीति में उनका प्रवेश 80 के दशक में हुआ। 1985 में वे पहली बार बिजनौर से संसद में चुनकर आईं। 1990 में वे कांग्रेस पार्टी की कार्यकारिणी समिति की सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की महासचिव भी चुनी गईं। 1996 में वे दूसरी बार सांसद बनीं और तीसरी पारी उन्होंने 1998 में शुरु की। 2004 में बिहार के सासाराम से लोक सभा के लिए उनका चयन हुआ। 2004 में यूपीए सरकार में उन्हें सामाजिक न्याय मंत्रालय में मंत्री बनाया गया था। इस बार वे पाँचवीं बार संसद के लिए चुनी गई हैं। 31 मार्च 1945 को पटना में जन्मी मीरा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इंद्रप्रस्थ कालेज और मिरांडा हाउस में शिक्षा हासिल की। स्पैनिश भाषा में एडवांस्ड डिप्लोमा भी किया। उन्हें राइफल निशानेबाजी के लिए पदक भी मिला है। विधि की डिग्री के साथ वह उच्चतम न्यायालय बार एशोसिएशन की 1980 में सदस्य बनीं। उनकी शादी उच्चतम न्यायालय के वकील मंजुल कुमार के साथ हुई। उनका एक बेटा और दो बेटियां हैं।
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