Thursday, 9 December 2021

तो क्या पीएम मोदी ने सेट कर दिया है यूपी चुनाव का एजेंडा?


भारतीय सिनेमा के ग्रेटेस्ट शोमैन राजकपूर की साल 1955 में एक फिल्म आई थी- श्री 420. फिल्म में मुख्य किरदार के रूप में राजकपूर के ऊपर फिल्माये गए गाने की वो चार पंक्तियां एक बार फिर से तब तरोताजा हो गई जब पीएम मोदी ने 'लाल टोपी' पर गंभीर लांछन लगाकर उत्तर प्रदेश की चुनावी बिसात में गरमाहट ला दी...

'मेरा जूता है जापानी
ये पतलून इंगलिश्तानी
सर पे लाल टोपी रूसी
फिर भी दिल है हिन्दुस्तानी...'

हम बात कर रहे हैं राजनीतिक रूप से देश के सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश की जहां चुनावी बिसात बिछ चुकी है. शह और मात के इस सियासी खेल में पीएम मोदी से लेकर अखिलेश यादव तक, सीएम योगी से लेकर जयंत चौधरी तक और प्रियंका गांधी से लेकर बहन मायावती तक सब सत्ता की सीढ़ी तक पहुंचने के लिए अपनी-अपनी चालें चलने शुरू कर दिए हैं. इसी कड़ी में पीएम मोदी ने भी फ़िराक़ गोरखपुरी की धरती गोरखपुर से अपनी चाल यह कहकर चल दी है कि 'लाल टोपी' उत्तर प्रदेश के लिए खतरे की घंटी है. सियासी पंडितों ने पीएम मोदी के इस सियासी तीर को आंकने में बिना देरी किए सवाल उछालने शुरू कर दिए कि क्या प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सत्ताधारी पार्टी भाजपा यह मान चुकी है कि आने वाले चुनाव में उनका मुकाबला अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी से ही होना है जिनकी पहचान 'साइकिल' से कम और 'लाल टोपी' से ज्यादा है?    

पीएम मोदी के निशाने पर 'लाल टोपी' क्यों?
मंगलवार को मेरठ के दबथुवा में जिस वक्त सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह परिवर्तन रैली के मंच से भाजपा के सूर्यास्त की बात कर रहे थे, ठीक उसी वक्त गोरखपुर में एक विशाल कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी का नाम लिए बगैर 'लाल टोपी' को निशाने पर लेते हुए पीएम मोदी कह रहे थे- 'लाल टोपी वालों को यूपी की सत्ता चाहिए घोटालों के लिए, अपनी तिजोरी भरने के लिए, अवैध कब्जों के लिए, माफिया को खुली छूट देने के लिए. 'लाल टोपी' वालों को सरकार बनानी है आतंकवादियों पर मेहरबानी दिखाने के लिए, आतंकियों को जेल से छुड़ाने के लिए. याद रखिए, लाल टोपी वाले यूपी के लिए रेड अलर्ट हैं यानी खतरे की घंटी.' सीधे तौर पर पीएम मोदी ने सपा की पूर्ववर्ती सरकार पर तीखा तंज किया है. लोगों को आगाह किया है कि अगर आपने फिर से ऐसे लोगों के हाथों में सत्ता सौंपी तो पूरा प्रदेश फिर से 'गुंडा राज' की गिरफ्त में होगा. जानबूझकर पीएम मोदी ने सपा के चुनाव चिह्न 'साइकिल' को टारगेट नहीं कर 'लाल टोपी' को किया है क्योंकि साइकिल आमजन की सवारी है. लिहाजा आमजन की भावनाओं को ठेस न पहुंचे सो सपा की जान से प्यारी 'लाल टोपी' पर निशाना साधा है. कहें तो 'लाल टोपी' को उछालकर पीएम मोदी ने यूपी चुनाव का एजेंडा सेट कर दिया है.

'लाल टोपी' के एक तीर से साधे कई निशाने
बड़ा सवाल यह कि 'लाल टोपी' की आड़ लेकर पीएम मोदी इतनी तीखी बातें क्यों कर गए? दरअसल, मार्च 2018 में जब सपा के सांसद लाल टोपी पहन कर संसद भवन के अंदर दाखिल हुए तो पत्रकारों ने चुटकी लेते हुए पूछ दिया- ये क्या? तो उन्होंने अपनी टोपी को लहराते हुए कहा था- यह भाजपा के लिए रेड सिग्नल है, अलार्म बेल यानी खतरे की घंटी. कहा जा रहा है कि मंगलवार को गोरखपुर में पीएम मोदी ने उसी अलार्म बेल से यह कहकर चुनावी पटलवार किया है कि 'लाल टोपी' वालों को सिर्फ लाल बत्ती चाहिए, ये यूपी के लिए रेड अलर्ट है. आप पूछ सकते हैं कि पीएम मोदी ने इस पलटवार के लिए तीन साल से अधिक समय का इंतजार क्यों किया? पीएम मोदी अक्सर ऐसा करते हैं, लेकिन अब देखना यह है कि शब्दों की बाजीगरी में जिस तीर से पीएम मोदी ने सपा को निशाने पर लिया है वह लक्ष्य को कितना बेध पाता है. पीएम मोदी को यह भी लगता है कि जिस तरह से बिहार चुनाव में उन्होंने बार-बार लालू यादव के 'जंगल राज' का जिक्र अपने भाषणों में कर तेजस्वी यादव की आरजेडी को सत्ता की सीढ़ी पर चढ़ने नहीं दिया, ठीक उसी तरह से यूपी में भी अखिलेश यादव की 'लाल टोपी' से जनभावना को इतना आतंकित कर दिया जाए कि सपा सत्ता की रेस से बाहर हो जाए. एक और अहम बात यह भी कि दक्षिणपंथी दल भाजपा वाम दलों को दुश्मन नंबर-एक मानती रही है और चूंकि वाम दलों के झंडे का रंग भी गहरा लाल है जो सपा की 'लाल टोपी' से काफी मेल खाता है. कहने का तात्पर्य यह कि पीएम मोदी ने 'लाल टोपी' के एक तीर से कई निशाने साधे हैं.

भाजपा को भारी न पड़ जाए 'लाल टोपी' का तंज  
यूपी चुनाव में अभी तीन महीने से अधिक का वक्त बाकी है. कहते हैं कि राजनीति में हालात बदलने के लिए कई बार इतना वक्त काफी होता है, लेकिन पीएम मोदी और सीएम योगी के हालिया रूख से इतना तो साफ हो ही गया है कि इस बार की चुनावी बिसात पर भाजपा सपा को अपना मुख्य प्रतिद्वंद्वी मान चुकी है. ये अपने-आप में अखिलेश यादव की महत्ता को भी रेखांकित करता है. केंद्र और राज्य की सत्ता में काबिज भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेता और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'लाल टोपी' पर तंज कसकर इस बात को सार्वजनिक तौर पर स्वीकार कर लिया है कि उनकी लड़ाई अखिलेश यादव से ही है. निश्चित तौर पर मोदी के इस तंज ने अखिलेश यादव को बैठे-बिठाए चुनावी समर में कूदने का एक नायाब चुनावी मुद्दा दे दिया है. कहते हैं कि संपूर्ण क्रांति के अग्रदूत लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने सबसे पहले 'लाल टोपी' पहनी थी. तभी से यूपी में लाल और भगवा रंग के बीच एक प्रतीकात्मक संघर्ष जारी है. 1992 में जब समाजवादी पार्टी की स्थापना हुई तो राममनोहर लोहिया के अनुयायी रहे जनेश्वर मिश्रा, बृजभूषण तिवारी, मोहन सिंह आदि ने इसमें अहम भूमिका निभाई थी और उन्होंने 'लाल टोपी' को अपनाया था. श्री 420 के उस गाने को ही लें जिसमें राजकपूर कह रहे हैं पैर में जापानी जूता, बदन पे इंगलिश्तानी पतलून और सिर पे रूसी लाल टोपी होते हुए भी दिल तो हिन्दुस्तानी ही है. ऐसे में पीएम मोदी ने 'लाल टोपी' को जिस तरीके से कठघरे में खड़ा किया है, आने वाले वक्त में अखिलेश यादव निश्चित रूप से मुद्दा बनाकर 'लाल टोपी' के ऐतिहासिक प्रसंगों के साथ पलटवार जरूर करेंगे.  

बहरहाल, भगवा टोपी बनाम लाल टोपी की जंग में फंसा उत्तर प्रदेश का जनादेश किस टोपी के रंग को चोखा करता है ये तो विधानसभा चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे, लेकिन जब बात गोरखपुर की धरती से निकली है तो लाल टोपी बनाम भगवा टोपी की सियासत में फंसे सियासतदानों चाहे वो पीएम नरेंद्र मोदी हों या फिर सीएम योगी आदित्यनाथ, अखिलेश यादव हों या फिर बहन मायावती, प्रियंका गांधी हों या फिर चौधरी जयंत सिंह सबको मशहूर शायर फ़िराक़ गोरखपुरी के इस शेर को जरूर पढ़ना चाहिए, उसके गूढ़ अर्थ को जरूर समझना चाहिए और हो सके तो अपनी गंदी सियासत को गुडबॉय कर इसे आत्मसात करना चाहिए...

'मज़हब कोई लौटा ले, और उसकी जगह दे दे
तहज़ीब सलीके की, इंसान करीने के।' 

 

(8 दिसंबर 2021 को https://www.tv9hindi.com में प्रकाशित)
https://www.tv9hindi.com/opinion/prime-minister-narendra-modi-has-set-the-agenda-of-uttar-pradesh-assembly-elections-2022-by-targeting-the-red-cap-of-akhilesh-yadav-949019.html

 

No comments: