Monday, 6 April 2020

कोरोना संकट को कमतर आंकना बड़ी भूल

चीन में जब कोरोना वायरस कहर ढा रहा था और दुनिया के तमाम देश इस महामारी से लड़ने की तैयारियों में जुटे थे तब भारत की स्थिति इसके बिल्कुल उलट थी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 23 मार्च 2020 को मोदी सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अपने एक ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा भी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सलाह के बावजूद वेंटिलेटर और सर्जिकल मास्क का पर्याप्त स्टाक रखने के विपरीत भारत सरकार ने 19 मार्च तक इन सभी चीजों के निर्यात की अनुमति क्यों दीं? ये खिलवाड़ किन ताक़तों की शह पर हुआ? क्या यह आपराधिक साजिश नहीं है?

अगर याद हो तो 27 फरवरी 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गाइडलाइन जारी करते हुए बताया था, दुनियाभर में पीपीई किट का भंडारण पर्याप्त नहीं है और लगता है कि जल्द ही गाउन और गोगल्स (चश्में) की आपूर्ति भी कम पड़ जाएगी। गलत जानकारी और भयाक्रांत लोगों की तीव्र खरीदारी और साथ ही कोविड-19 के बढ़ते मामलों के चलते दुनिया में पीपीई की उपलब्धता कम हो जाएगी। जैसा कि डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन में बताया गया, पीपीई किट (पर्सनल प्रोटेक्ट‍िव एक्व‍िपमेंट किट) का मतलब है : गाउन, बूट, कैप, एन 95 मास्क, ग्लब्स और गॉगल्स। इसके बावजूद भारत सरकार ने घरेलू पीपीई के निर्यात पर रोक लगाने में 19 मार्च तक का समय लगा दिया। 18 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपने घरों की बालकनी से ताली, थाली और घंटी बजाकर स्वास्थ्य कर्मचारियों की हौसला अफ़जाई करने को कहा था जबकि इसके एक दिन बाद जाकर भारत सरकार ने देश में निर्मित पीपीई किट के निर्यात पर रोक लगाई।

हालांकि सरकार ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक पत्र जारी करते हुए राहुल गांधी के आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि 31 जनवरी को ही घरेलू पीपीई किट के निर्यात पर रोक लगा दी गई थी। कैरवान की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह सही है कि 30 जनवरी को भारत में कोविड-19 का पहला मामला सामने आने के बाद विदेश व्यापार निदेशालय ने सभी पीपीई के निर्यात पर रोक लगा दी थी, लेकिन 8 फरवरी को सरकार ने इस आदेश में संशोधन कर सर्जिकल मास्क और सभी तरह के दस्तानों के निर्यात की अनुमति दे दी। इसके बाद 25 फरवरी को सरकार ने उपरोक्त रोक को और ढीला करते हुए 8 नए आइटमों के निर्यात की भी मंजूरी दे दी। स्पष्ट है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशों के बावजूद भारत सरकार ने पीपीई किट की मांग का आंकलन नहीं किया और भारतीय डॉक्टर व नर्स आज इसकी कीमत चुका रहे हैं। कोरोना मरीज की बढ़ती संख्या के बीच देश वक्त पीपीई किट के संकट का सामना कर रहा है।

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि इस वक्त देश में डॉक्टर्स, नर्सेस और हेल्थ प्रोफेशनल्स को 7 लाख 25 हजार ओवरऑल हैजमेट सूट्स चाहिए, 60 लाख एन-95 मास्क चाहिए और एक करोड़ तीन प्लाई मास्क चाहिए। यह बात कोई और नहीं, 18 मार्च 2020 की भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय की बैठक में कही गई है। तो क्या ये दोनों चीजें अपराध नहीं हैं- पहला, इन सब संसाधनों को लेकर एक महीने से अधिक का समय यूं ही गंवा दिया गया और दूसरा, इन सबका 19 मार्च 2020 तक निर्यात करते रहना?

इन बातों का जिक्र हम इसलिए कर रहे हैं क्योंकि स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना जैसी बीमारी जो संक्रमित व्यक्ति से फैलता है, चार गुना ज़्यादा ख़तरा होता है। जब डॉक्टर कोरोना जैसी भीषण संक्रामक बीमारी वाले मरीज़ का इलाज कर रहे होते हैं तो उन्हें एन-95 मास्क चाहिए होता है, उन्हें गाउन, कैप, शू कवर भी चाहिए होते हैं। अगर इन्हें ये जरूरी सामान नहीं मिल पाए तो मरीज़ों का इलाज करने वाले डॉक्टरों के संक्रमित होने की आशंका बढ़ जाएगी। लिहाजा यह ज़रूरी है कि कोरोना से जंग जीतने के लिए हैल्थ वर्करों (डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, सफाईकर्मी) की सेहत ठीक रहे और ये तभी संभव है जब जंग से मुकाबला करने वाले सभी चिकित्सा कर्मियों को पीपीई किट मिले।

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