Saturday, 25 April 2020

कोरोना क्रांति : बिल गेट्स की ये चार बातें बहुत कुछ कह रही हैं

How to fight future pandemics हेडलाइंस से माइक्रोसॉफ्ट के सह संस्थापक बिल गेट्स ने द इकोनॉमिस्ट में जो आर्टिकल लिखा है उसमें बहुत सारी बातें कही गईं हैं लेकिन उनमें से चार अहम बातों का जिक्र करना यहां बेहद जरूरी है। ये बातें आने वाले वक्त यानी आफ्टर कोरोना दुनिया कैसी होगी को लेकर जाने-अनजाने में कई तरह के संकेत भी देता है और कुछ सवाल भी खड़े करता है। 

पहली बात बिल गेट्स ने कोरोना वैक्सीन को लेकर कही है। इसमें गेट्स का कहना है- जब इतिहासकार कोविड-19 महामारी पर किताब लिखेंगे तो जो हम अब तक जीते रहे हैं, वह हिस्सा एक तिहाई के आसपास ही होगा। किताब की कहानी का बड़ा हिस्सा उस पर होगा, जो आगे होना है। यूरोप के अधिकांश हिस्से, पूर्वी एशिया और उत्तरी अमेरिका में इस महामारी का चरम संभवत: इस महीने के आखिर तक बीत जाएगा। कई लोगों को उम्मीद है कि कुछ हफ्तों में चीजें वैसी ही हो जाएंगी, जैसी बीते दिसंबर में थीं। लेकिन दुर्भाग्य से, ऐसा नहीं होगा। बिल गेट्स कहते हैं- I believe that humanity will beat this pandemic, but only when most of the population is vaccinated. Until then, life will not return to normal. मुझे भरोसा है कि मानवता इस महामारी को हरा देगी, लेकिन यह तभी होगा जब अधिकतर जनसंख्या को वैक्सीन लगा दी जाएगी। तब तक जिंदगी सामान्य ढर्रे पर नहीं लौट सकेगी।

दूसरी अहम बात गेट्स ने कोरोना महामारी के बाद आने वाले वक्त में जो महामारी आएगी उसके बारे में की है। बिल गेट्स का कहना है कि 2021 के मध्य यानी जून 2021 के बाद दुनियाभर में उपलब्ध संस्थानों में वैक्सीन बन रही होंगी। अगर ऐसा होता है तो यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी जब मानव पहली बार इतनी तेजी से एक नई बीमारी को पहचानने और फिर उसके खिलाफ प्रतिरक्षण का काम करेगा। वैक्सीन पर प्रगति के अलावा इस महामारी की जो बड़ी मेडिकल उपलब्धियां होंगी वह जांच के क्षेत्र में होगी। अगली बार जब कोई नया वायरस उभरेगा तो लोग संभवत: उसकी घर पर वैसे ही जांच कर सकेंगे, जैसे आज प्रेगनेंसी टेस्ट करते हैं। बस उन्हें अपनी नाक के भीतर से स्वैब लेना होगा।

तीसरी अहम बात जो बिल गेट्स ने अपने इस आर्टिकल में की है वह संयुक्त राष्ट्र जैसा एक नया संगठन बनाने को लेकर है। गेट्स का कहना है कि कोविड-19 के बाद दुनियाभर के नेताओं को अगली महामारी रोकने के लिए यूएन जैसा संस्थान बनाना चाहिए। यह राष्ट्रीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संगठनों का मिश्रण होना चाहिए। आज के युद्ध अभ्यासों की तरह ये संगठन नियमित तौर पर ‘जीवाणु अभ्यास’ भी करेंगे। इससे जब कभी किसी चमगादड़ या पक्षी से मनुष्यों पर कोई नया वायरस कूदेगा तो हम तैयार रहेंगे। ये संगठन हमें इस बात के लिए भी तैयार करेंगे कि अगर कोई अपनी लैब में किसी संक्रामक बीमारी को तैयार करके हथियार की तरह उसका इस्तेमाल करता है, तो उससे कैसे निपटना है।

चौथी और अंतिम महत्वपूर्ण बात में बिल गेट्स यह भी कहते हैं कि कोरोना महामारी ने हमें दिखा दिया है कि वायरस सीमा कानूनों का पालन नहीं करते हैं और हम सब माइक्रोस्कोपिक जीवाणुओं के एक नेटवर्क से आपस में जुड़े हुए हैं। इतिहास हमेशा एक तय ढर्रे पर नहीं चलता। लोग तय करते हैं कि कौन सी दिशा लेनी है और वे गलत मोड़ भी ले सकते हैं। गेट्स का दावा है कि 2021 के बाद के साल बहुत कुछ 1945 के बाद के सालों जैसे ही होंगे। लेकिन आज की सबसे ज्यादा समानता 10 नवंबर 1942 से हो सकती है। जब ब्रिटेन ने युद्ध में पहली जमीनी लड़ाई जीती थी और विंस्टन चर्चिल ने एक भाषण में घोषणा की- This is not the end. It is not even the beginning of the end. But it is, perhaps, the end of the beginning. यह अंत नहीं है। यह अंत की शुरुआत भी नहीं है। लेकिन यह शायद शुरुआत का अंत है।

बिल गेट्स का यह आर्टिकल 23 अप्रैल 2020 को द इकोनॉमिस्ट में प्रकाशित हुआ है। इससे पहले भी गेट्स ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर कोरोना वायरस को लेकर कई बातें कही हैं जिसके बारे में हम अगले ब्लॉग में बात करेंगे कि काफी हद तक वो घटित भी हुई हैं। लेकिन फिलहाल हम यह सवाल आप प्रबुद्ध पाठकों पर छोड़ते हैं कि कोरोना महामारी के बाद जो वक्त आने वाला है वह कैसा होगा, दुनिया कैसी होगी, इस सबका आंकलन और वह भी सत्य के बेहद करीब, बिल गेट्स कैसे बता पा रहे हैं?

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