कोरोना वायरस ने चीन, अमेरिका, इटली, स्पेन, भारत समेत पूरी दुनिया के 200 से अधिक देशों में तबाही मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दावे की तर्ज पर भारतीय हुक्मरान ने भी शुरूआती दौर में यही कहा था कि कोरोना वायरस भारत में टिकने वाला नहीं है। जबकि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और सांसद राहुल गांधी इस बारे में सरकार को लगातार इस संकट से आगाह कर रहे थे। साफ है कि कोरोना महासंकट को लेकर सरकार ने लापरवाही बरती जिसका खामियाजा कम्प्लीट लॉकडाउन के रूप में आज पूरा देश भुगत रहा है। भारतीय इकनॉमी का पूरा पहिया थम चुका है।
जरा पीछे मुड़कर देखें तो भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को केरल में सबसे पहले सामने आया। केरल का जो मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित बताया गया वह चीन के वुहान यूनिवर्सिटी का छात्र था। 30 जनवरी से पहले जापान और अमेरिका में कोरोना का संक्रमण फैल चुका था। याद करें तो 31 जनवरी 2020 को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चीन में कोरोना वायरस से पैदा होने वाले वैश्विक महासंकट की तरफ आगाह करते हुए पहला ट्वीट किया था। राहुल गांधी ने यह ट्वीट तब किया था जब दुनियाभर में एक लाख से अधिक लोग इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो चुके थे और चीन में 100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके थे।
उसके बाद 12 फरवरी को दूसरे ट्वीट में राहुल ने कहा था कि कोरोना संकट हमारे देश की जनता और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक होने वाला है। जरूरी है कि समय रहते इस संकट से निपटने के लिए सरकार एक्शन ले। 3 मार्च को अपने तीसरे ट्वीट में राहुल गांधी ने पीएमओ इंडिया को संबोधित करते हुए एक बार फिर कोरोना वायरस की चुनौती के बारे में जिक्र करते हुए जानना चाहा था कि इस दिशा में सरकार क्या कर रही है। 5 मार्च को एक और ट्वीट में राहुल ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन के एक बयान की तुलना टाइटेनिक जहाज के उस कप्तान से की थी जिसने कहा था कि यात्री घबराएं नहीं, उनका शिप डूबने वाला नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यही कहा था कि स्थिति सरकार के नियंत्रण में है। आप थोड़ा सोचकर देखिए, अगर सरकार फरवरी के महीने में ही दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी रखती और देश के अंदर इसको लेकर तैयारी शुरू कर देती तो हालात इस तरह से बेकाबू नहीं होती।
अगर आप गौर करें तो कोरोना का पहला केस चीन में 1 दिसंबर 2019 को ही सामने आ गया था। 13 जनवरी को चीन के बाहर कोरोना का पहला मामला थाईलैंड में 61 वर्षीय महिला के रूप में सामने आया। 15 जनवरी को जापान में कोरोना का पहला मामला सामने आया। 21 जनवरी को अमेरिका में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया। यह शख्स छह दिन पहले चीन से लौटा था। फिर 30 जनवरी को भारत के केरल में पहला केस सामने आया जो चीन के वुहान से आया। कहने का मतलब यह है कि भारत को इस संकट को समझने के लिए दो महीने का वक्त मिला लेकिन इसे समझने की जहमत नहीं उठाई गई।
देश में कोरोना संकट लगातार गहरा रहा था और आप अमेरिकी भगवान डोनाल्ड ट्रम्प के स्वागत में पलक पांवरे बिछाए खड़े थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से चेतावनियां जारी होने के बावजूद ट्रम्प के स्वागत में गुजरात में हज़ारों लोगों को जुटाया गया। तब तक अमेरिका में कोरोना फैलने की खबर हमें मिल चुकी थी। ट्रम्प ने अपने देश को तो डुबोया ही, हमें भी अपनी चपेट में ले लिया। आज इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? पूरी सरकार गुजरात से लेकर नई दिल्ली के लुटियन जोन तक ट्रम्प के स्वागत में जुटी थी और तभी राजधानी दिल्ली सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस रहा था। हमारे हिन्दू और मुसलमान भाईयों का कत्ल हो रहा था। घर जलाए जा रहे थे, दुकानें जलाई जा रही थी। लेकिन आपने उस वक्त भी खामोशी की चादर ओढे रखी। आखिर क्यों? कोरोना अपना खौफनाक जाल बिछा रहा था और देश के सैकड़ों रहनुमा देश की संसद में एनपीआर, एनआरसी, शाहीनबाग और सांप्रदायिक दंगे को लेकर तू-तू मैं-मैं कर रहे थे। देश में कोरोना फैल रहा था और सत्ताधारी पार्टी मध्यप्रदेश में तख्तापलट करने में जुटी थी। आपने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था और एक दिन बाद शिवराज सरकार शपथ ले रही थी जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग की कोई परवाह नहीं की गई।
जरा पीछे मुड़कर देखें तो भारत में कोरोना वायरस का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को केरल में सबसे पहले सामने आया। केरल का जो मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित बताया गया वह चीन के वुहान यूनिवर्सिटी का छात्र था। 30 जनवरी से पहले जापान और अमेरिका में कोरोना का संक्रमण फैल चुका था। याद करें तो 31 जनवरी 2020 को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने चीन में कोरोना वायरस से पैदा होने वाले वैश्विक महासंकट की तरफ आगाह करते हुए पहला ट्वीट किया था। राहुल गांधी ने यह ट्वीट तब किया था जब दुनियाभर में एक लाख से अधिक लोग इस खतरनाक वायरस से संक्रमित हो चुके थे और चीन में 100 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके थे।
उसके बाद 12 फरवरी को दूसरे ट्वीट में राहुल ने कहा था कि कोरोना संकट हमारे देश की जनता और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक होने वाला है। जरूरी है कि समय रहते इस संकट से निपटने के लिए सरकार एक्शन ले। 3 मार्च को अपने तीसरे ट्वीट में राहुल गांधी ने पीएमओ इंडिया को संबोधित करते हुए एक बार फिर कोरोना वायरस की चुनौती के बारे में जिक्र करते हुए जानना चाहा था कि इस दिशा में सरकार क्या कर रही है। 5 मार्च को एक और ट्वीट में राहुल ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्द्धन के एक बयान की तुलना टाइटेनिक जहाज के उस कप्तान से की थी जिसने कहा था कि यात्री घबराएं नहीं, उनका शिप डूबने वाला नहीं है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने यही कहा था कि स्थिति सरकार के नियंत्रण में है। आप थोड़ा सोचकर देखिए, अगर सरकार फरवरी के महीने में ही दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर कड़ी निगरानी रखती और देश के अंदर इसको लेकर तैयारी शुरू कर देती तो हालात इस तरह से बेकाबू नहीं होती।
अगर आप गौर करें तो कोरोना का पहला केस चीन में 1 दिसंबर 2019 को ही सामने आ गया था। 13 जनवरी को चीन के बाहर कोरोना का पहला मामला थाईलैंड में 61 वर्षीय महिला के रूप में सामने आया। 15 जनवरी को जापान में कोरोना का पहला मामला सामने आया। 21 जनवरी को अमेरिका में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया। यह शख्स छह दिन पहले चीन से लौटा था। फिर 30 जनवरी को भारत के केरल में पहला केस सामने आया जो चीन के वुहान से आया। कहने का मतलब यह है कि भारत को इस संकट को समझने के लिए दो महीने का वक्त मिला लेकिन इसे समझने की जहमत नहीं उठाई गई।
देश में कोरोना संकट लगातार गहरा रहा था और आप अमेरिकी भगवान डोनाल्ड ट्रम्प के स्वागत में पलक पांवरे बिछाए खड़े थे। विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से चेतावनियां जारी होने के बावजूद ट्रम्प के स्वागत में गुजरात में हज़ारों लोगों को जुटाया गया। तब तक अमेरिका में कोरोना फैलने की खबर हमें मिल चुकी थी। ट्रम्प ने अपने देश को तो डुबोया ही, हमें भी अपनी चपेट में ले लिया। आज इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? पूरी सरकार गुजरात से लेकर नई दिल्ली के लुटियन जोन तक ट्रम्प के स्वागत में जुटी थी और तभी राजधानी दिल्ली सांप्रदायिक दंगों की आग में झुलस रहा था। हमारे हिन्दू और मुसलमान भाईयों का कत्ल हो रहा था। घर जलाए जा रहे थे, दुकानें जलाई जा रही थी। लेकिन आपने उस वक्त भी खामोशी की चादर ओढे रखी। आखिर क्यों? कोरोना अपना खौफनाक जाल बिछा रहा था और देश के सैकड़ों रहनुमा देश की संसद में एनपीआर, एनआरसी, शाहीनबाग और सांप्रदायिक दंगे को लेकर तू-तू मैं-मैं कर रहे थे। देश में कोरोना फैल रहा था और सत्ताधारी पार्टी मध्यप्रदेश में तख्तापलट करने में जुटी थी। आपने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का ऐलान किया था और एक दिन बाद शिवराज सरकार शपथ ले रही थी जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग की कोई परवाह नहीं की गई।

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